पाकुड़ संवाददाता : श्रावण मास के दूसरे सोमवार को जिला परिषद पाकुड़ 09 सदस्य सह रामभक्त सेवा दल की प्रदेश अध्यक्षा सनातनी पिंकी मंडल के नेतृत्व में हजारों ग्रामीणों के सहयोग से हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी “चलो धरनी बाबा धाम” के भव्य आयोजन को सफलतापूर्वक संपन्न किया गया। महादेव के पावन धाम पाकुड़ जिले के धरनी पहाड़ जहां महादेव हजारों फीट ऊंचे पहाड़ी के ऊपर हरे भरे हरियालियों के बीच प्रकृति के गोद में विराजमान है में शिव भक्तों का जन सैलाब इस प्रकार उमड़ा जैसे सनातन धर्म संस्कृति के प्रति आस्था का संकल्पित भाव भगवामय के साथ संदेश दे रहा हो।

कार्यक्रम गोपीनाथपुर ग्राम से बोल बम के उद्घोष के साथ 50 शिवभक्त पदयात्रा, जिले के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्र से अनुमानित 300 टोटो, 70 बाइक,7 कार,3 पिकअप वाहन,1 चल चिकित्सक वाहन के साथ धरनी पहाड़ के आगमन के लिए कार्यक्रम का प्रारंभ हुआ।आने के क्रम में पूरे रास्ते भगवामय झंडो,पहने परिधान एवं बोल बम, हर हर महादेव के उद्घोष के साथ पूरा मार्ग भगवामय देखने को बन रहा था। वही रास्ते में विभिन्न जगहों पर नवयुवकों द्वारा सेवा शिविर के माध्यम से शिव भक्तों का सरवत- पानी जैसे चीजों से स्वागत किया गया।

वहीं कार्यक्रम स्थल पर कमिटी के द्वारा महाप्रसाद के साथ तमाम जरूरी चीजों का इतंजाम के साथ तोड़ाई के भी युवा साथियों के द्वारा सेवा शिविर लगाकर शिवभक्तों को कोई समस्या ना हो के लिए हौसला बढ़ाया गया। साथ ही विभिन्न जगहों से आए कलाकारों द्वारा भक्ति जागरण के कार्यक्रम में शिवभक्तों ने महादेव के भजनों पर खूब झूमा।वही मौके पर उपस्थित पिंकी मंडल ने कहा “पूरे तीर्थ क्रम में रास्ते भर उक्त धरनी बाबाधाम स्थान तक विभिन्न जीवन दर्शनों पर मनोरम प्रकृति स्थलों से शिव भक्तों को जोड़ते हुए भक्तिमय माहौल के साथ-साथ

लोगों के बीच एक समन्वय स्थापित कराते हुए स्थानीय धरनी पहाड़ शिव मंदिरों को पर्यटक स्थल के रूप में प्रसिद्ध के साथ साथ सौंदरीकरण दृष्टिकोण से भी बेहतर बने इसके लिए पहल को ज्यादा से ज्यादा शिवभक्तों का ध्यान आकर्षित कराने के प्रयास के लिए यह कार्यक्रम का आयोजन किया गया है।”साथ ही मौके पर उपस्थित कार्यक्रम के निवेदक रंकुश मंडल ने कहा कार्यक्रम को सफल आयोजन के लिए समस्त शिव भक्तों को बहुत-बहुत धन्यवाद किया। कार्यक्रम में हजारों की संख्या में ग्रामीणों के साथ-साथ हजारों हजार की संख्या में शिवभक्त मौजूद थे।

