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झारखंड के निर्माता, आदिवासी समाज के पुरोधा और गरीबों के मसीहा श्रद्धेय गुरुजी अब हमारे बीच नहीं रहे

झारखंड का सूरज सोमवार की सुबह उगने से पहले ही हमेशा के लिए अस्त हो गया

रांची विशेष : गुरुजी ने न सिर्फ झारखंड को अलग राज्य का दर्जा दिलाया, बल्कि आदिवासी समाज को अंधकार से निकालकर अधिकार और आत्मसम्मान के उजाले की ओर अग्रसर किया। वे हमेशा से राज्य के जनता के लिए पिता तुल्य थे और रहेंगे। उनका यूं अचानक चले जाना, न सिर्फ झारखंड बल्कि पूरे देश के लिए अपूरणीय क्षति हुई है। उन्होंने अपने जीवन काल में हमेशा से गरीबों और वंचितों के हक में काम करने के लिए खुद संघर्ष किए है और दूसरे को प्रेरित भी करते थे। शिबू सोरेन एक प्रमुख भारतीय राजनेता और झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हैं। वह झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के संस्थापक और अध्यक्ष हैं। शिबू सोरेन को झारखंड आंदोलन के प्रमुख नेताओं में से एक माना जाता है, जिसने झारखंड राज्य के गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

शिबू सोरेन की राजनीतिक यात्रा

शिबू सोरेन ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत 1960 के दशक में की थी, जब उन्होंने झारखंड आंदोलन में भाग लेना शुरू किया।- 1970 के दशक में, उन्होंने झारखंड मुक्ति मोर्चा की स्थापना की और इसके अध्यक्ष बने। शिबू सोरेन ने झारखंड राज्य के गठन के लिए लंबी लड़ाई लड़ी और 2000 में झारखंड के गठन के बाद, वह राज्य के पहले मुख्यमंत्री बने।- उन्होंने झारखंड के मुख्यमंत्री के रूप में तीन बार कार्य किया है।

शिबू सोरेन की विरासत:

शिबू सोरेन को झारखंड के लोगों के बीच एक लोकप्रिय नेता माना जाता है, जिन्होंने राज्य के विकास और आदिवासी समुदायों के अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ी।- उनकी राजनीतिक विरासत आज भी झारखंड की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।यह ध्यान रखें कि शिबू सोरेन की राजनीतिक यात्रा और विरासत के बारे में विभिन्न दृष्टिकोण हो सकते हैं।

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