पाकुड़ अपडेट : हाल ही में एक सड़क दुर्घटना में एक युवक की मौत हो गई जिसपर पूरा शहर में तोड़फोड़ एवं प्राथमिकी दर्ज हुई, कई बेगुनाह भी इस कांड में अभियुक्त बन गए जो आज तक परेशान है लेकिन फिर भी परिवहन नियमों का पालन न जनता कर रही है और न ही विभाग करवा पा रही है। पुलिस लाइन के पास दिन के उजाले में एक बस को देखा गया जिसमें बिना सुरक्षा मानकों का इस्तेमाल किए बस की सवारी आम जन कर रहे थे और शायद इस बस को रोकने वाला कोई नहीं था। क्षमता से अधिक बस की छत पर लोग इस भीष्म गर्मी में बैठकर सफर कर रहे थे। सबसे बड़ी बात एक तो बस की रफ्तार काफी तेज थी और इस भीष्म गर्मी, अगर कोई यात्री चक्कर खाकर चलती बस से नीचे गिर जाता है तो इसके जिम्मवार कौन होगा, क्या खुद की गलती के बाद शहर में आगजनी और प्रशासन के खिलाफ नारे बाजी होगी, क्या यह उचित है ? ऐसे मामलों पर जितना संबंधित विभाग दोषी है उतना ही आम जन मानस भी। आज विभाग की कमजोरी के कारण परिवहन नियमों का पालन सही से नहीं हो रही है जिसे जरूरत है सख्त करने की।
