पाकुड़ अपडेट : एक और जहां सरकार दावा करती है कि उनके द्वारा बेहतर शिक्षा समाज को दिया जा रहा है लेकिन वहीं दूसरी और शिक्षा विभाग में बैठे पदाधिकारी एवं कर्मियों की लापरवाही के कारण आज भी शिक्षा की स्थिति दयनीय होते जा रही है। जिसका ताजा उदाहरण गुरुवार को मध्य विद्यालय कूड़ापाड़ा में देखने को मिला जहां कुल 6 शिक्षक कार्यरत है परंतु अजीब विडंबना है कि एक ही दिन में कुल चार शिक्षक इस विद्यालय से जिसमें कनिका टुडू जो विद्यालय के प्रधान अध्यापक है साथ ही नसरीन सलमा, शकीला खातून एवं अंजलि घोष छुट्टी में बताया गया।

फिलहाल इतने बच्चों में मात्र दो पारा शिक्षक मौजूद थे। इस बात की पुष्टि करने हेतु प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी सुमिता मरांडी से जब इस मामले पर पूछा गया तो उन्होंने कहा कि एक साथ सभी छुट्टी कैसे ले सकती है, इसकी सूचना उन्हें नहीं है और छुट्टी लेने के लिए प्रखंड कार्यालय से अनुमति लेना अनिवार्य होता है।

वही विद्यालय के प्राचार्य के द्वारा एक पत्र विद्यालय में रखा गया था जिसमें प्रखंड कार्यालय में पदस्थापित कोई नंदू द्वारा रिसीव किया गया पत्र देखा गया लेकिन उस पत्र में किसी प्रकार के छुट्टी से संबंधित कोई प्रतिक्रिया या अनुमति नहीं थी।

मतलब शिक्षकों की मनमानी इस प्रकार से है जैसे जब छुट्टी की आवश्यकता हो तब एक आवेदन देकर बस छुट्टी ले लेना है , मतलब विभागीय आदेश या अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होती है या नहीं होनी चाहिए।

इससे साफ प्रतीक होता है कि हमारा शिक्षा विभाग में पदस्थापित शिक्षकों की जिम्मेवारी कितना कारगर है। क्या इसी सिस्टम और नीति से शिक्षित समाज का निर्माण संभव हो पाएगा। क्या पदाधिकारी क्या सिर्फ सरकारी वेतन लेने के लिए होते हैं या क्षेत्र में इन चीजों पर ध्यान रखने के लिए।
