पाकुड़ अपडेट : जिले के अमड़ापाड़ा प्रखंड में संचालित कोल माइंस में नियमों को ताक पर रखकर की जा रही कोयला ब्लास्टिंग का एक गंभीर मामला सामने आया है। प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता सुरेश अग्रवाल ने इस पर गहरी चिंता जताते हुए पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। अग्रवाल ने प्रेस को जारी बयान में कहा कि अमड़ापाड़ा प्रखंड स्थित दिलीप बिल्डकॉन लिमिटेड (DBL) यानि पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (PSPCL) के कोल माइंस- जिसे पूर्व में ‘एमटा कंपनी’ के नाम से जाना जाता था और वर्तमान में पंचूवाड़ा सेंट्रल कोल माइंस डीबीएल कोल माइंस के रूप में संचालित है DBL में कोयला उत्खनन के लिए बड़े पैमाने पर ब्लास्टिंग की जा रही है। कहा कि”खदानों में जो कोयला उत्खनन ब्लास्टिंग मैगजीन के जरिए किया जा रहा है, वह आखिर किसके आदेश पर हो रहा है? लीज मिलने के उपरांत जो इकरारनामा (Agreement) तैयार किया गया था, उसकी शर्तों में क्या प्रावधान हैं? प्रशासन को इसकी गहनता से जांच करनी चाहिए।”
सरकारी DGMS के नियमों की सरेआम अनदेखी
अग्रवाल ने तकनीकी और सुरक्षा पहलुओं पर जोर देते हुए कहा कि कोयला खदानों में ब्लास्टिंग अत्यंत संवेदनशील और जोखिमपूर्ण कार्य होता है। इसके लिए खान सुरक्षा महानिदेशालय (DGMS – Directorate General of Mines Safety) द्वारा कड़े नियम और दिशानिर्देश तय किए गए हैं, जिनका पालन करना अति आवश्यक और अनिवार्य है।उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान में अमड़ापाड़ा के इस कोल माइंस में DGMS के सुरक्षा नियमों का पालन बिल्कुल नहीं किया जा रहा है। ब्लास्टिंग की वजह से आसपास के क्षेत्रों में कभी भी कोई बड़ी अप्रिय घटना या जान-माल का नुकसान हो सकता है। पर्यावरण और स्थानीय आबादी की सुरक्षा को भी दांव पर लगा दिया गया है।
उच्च स्तरीय जांच की मांग
उन्होंने जिला प्रशासन, राज्य सरकार और संबंधित खनन विभागों से मांग की है कि इस पूरे मामले को गंभीरता से लिया जाए। कंपनी के लीज इकरारनामे की फाइलों को खंगाला जाए और मौके पर सुरक्षा मानकों की जांच के लिए एक विशेष टीम भेजी जाए, ताकि नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सके।
