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झारखंड में पत्रकारों का सरकारी विद्यालयों में प्रवेश पर रोक, न खींच पाएंगे फोटो और न वीडियो

पाकुड़ / झारखंड: पत्रकारों को कहा जाता है लोकतंत्र का चौथा स्तंभ, शायद यह दर्जा सिर्फ नाम का है क्योंकि जनता की आवाज एवं सरकारी अफसरों , ठीकेदारों , योजनाओं की पोल खोलने की साहस करते ही पत्रकारों को झूठा मुकदमा, मारपीट, हत्या तक कर दिया जाता है क्योंकि पत्रकार सुरक्षा कानून है हो नहीं। बता दे इन दिनों सदर प्रखंड अंतर्गत धनुषपूजा मध्य विद्यालय की प्राचार्य सावित्री सोरेन अपने गलत व्यवहार के कारण हमेशा विवादों में रहती हैं।

बीते गुरुवार को सुबह करीब 08.26 बजे पत्रकार प्रीतम सिंह यादव पुलिस लाइन की ओर से शहर की ओर लौट रहा था, इसी क्रम में उन्होंने देखा कि धनुष पूजा मध्य विद्यालय के पास के एक गुमटी पर स्कूल के तीन छोटे बच्चे खड़े होकर कुछ खरीदारी कर रहे थे। तुरंत उनके द्वारा उक्त बच्चों से पूछा गया तो उन बच्चों ने कहा कि कूड़ा फेंकने के लिए बाहर आए हुए हैं। इस दरमियान इस पूरे घटना को कैमरे पर कैद कर लिया गया, क्योंकि उक्त गुमटी में नशीले पदार्थों की बिक्री होती है। फिर बच्चों के साथ पत्रकार विद्यालय के अंदर प्रवेश किया। विद्यालय प्रांगण में ही विद्यालय की प्राचार्य सावित्री सोरेन दिख गई। उन तक पहुंच कर सबसे पहले गुड मॉर्निंग कहा गया, लेकिन जवाब में पत्रकार के हाथ में मोबाइल देखने के बाद वह भड़क गई और बिना कुछ समझे कहने लगी कि पत्रकारों को विद्यालय के अंदर आना एवं वीडियो बनाना मना है। किसके आदेश पर विद्यालय में वीडियो बनाया जा रहा है। इतना कहते ही खुद वो अपने मोबाइल से पत्रकार का वीडियो बनाने लगी।

इतना ही नहीं और दो शिक्षिका भी वहां पहुंच गई और वे लोग भी अपने मोबाइल निकाल कर वीडियो बनाने लगी। इसके बाद इसी बात को लेकर नोंक झोंक हुई, जबकि पत्रकार के द्वारा बार बार समझाने का प्रयास किया गया कि उनका मकसद विवाद या विरोध करना नहीं था। शिक्षिका को समझाने का प्रयास किया गया कि उनका उद्देश्य विद्यालय के खिलाफ या किसी शिक्षिका के खिलाफ नहीं था। बाहर गुमटी पर नशीले पदार्थों की बिक्री होती है, विद्यालय के बच्चों द्वारा वहां पर नशे का सेवन न किया जाए, इसको लेकर चर्चा करने के लिए अंदर प्रवेश किया था। काफी देर बाद वे लोग शांत हुई, लेकिन इस घटना से पत्रकार के मान सम्मान पर ठेस पहुंचा क्योंकि इस तरह का दुर्व्यवहार विद्यालय की शिक्षिका के द्वारा विद्यालय के प्रांगण में किया गया जहां कुछ मजदूर कार्य कर रहे थे, रसोइया में महिलाएं खाना बना रही थी, विद्यालय के बच्चे अन्य शिक्षक सब देख रहे थे।

विभाग को लिखा गया पत्र

मामले को लेकर गुरुवार को ही जिला शिक्षा पदाधिकारी अनिता पूर्ति को पांच सदस्यीय पत्रकार उनके कार्यालय पहुंचकर लिखित शिकायत कि गई, जिसपर डीईओ के द्वारा कहा गया कि यह गलत है, शिक्षिका को इस तरह से बर्ताव नहीं करना चाहिए था, उन्हें बुलाकर पीड़ित पत्रकार के सामने पटकार लगाई एवं समझाया जायेगा लेकिन दो दिन बीत जाने के बाद भी विभाग द्वारा कार्यवाही की कोई सूचना पत्रकार को नहीं दिया गया जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

ऐसे ही मामलों पर होती है झूठा मुकदमा

आपको बता दे कि इसी तरह के मामलों पर जब पत्रकार सच्चाई और ईमानदारी से समाज के मुद्दों को उठाकर अपने मीडिया हाउस में प्रकाशित करने का प्रयास करते हैं तो उन्हें साजिश के तहत झूठा मुकदमा जिसमें गंभीर धाराओं को लगाकर जेल भेजने का काम किया जाता है और आखिरकार पत्रकार अपने जीवन काल में जेल एवं कोर्ट के चक्कर लगाते हुए मानसिक एवं आर्थिक तंगी में गुजरते है। जरूरत है जिला प्रशासन एवं राज्य सरकार ऐसे मामलों पर पत्रकारों के हित में कानून बनाए एवं माननीय न्यायालय भी ऐसे मामलों पर गंभीरतापूर्वक विचार करें ताकि समाज में पत्रकार निडर होकर समाज में छुपे जनमुद्दे, घोटाले को उजागर कर सके।

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