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डीएमएफटी फंड में वित्तीय अनियमितता की उच्चस्तरीय जांच की मांग

सुरेश अग्रवाल का दावा—धरातल पर 40 फीसदी काम, 60 फीसदी राशि की बंदरबांट; बोरिंग निविदा में भी गड़बड़ी का आरोप

पाकुड़ : जिले में डीएमएफटी (District Mineral Foundation Trust) फंड से कराए जा रहे कार्यों में कथित वित्तीय अनियमितता को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता सुरेश अग्रवाल ने उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि डीएमएफटी मद से स्वीकृत कई योजनाओं में कागज पर अधिक कार्य दिखाया गया, जबकि धरातल पर अपेक्षित कार्य नहीं हुआ। सुरेश अग्रवाल का दावा है कि कई योजनाओं में लगभग 40 प्रतिशत कार्य ही धरातल पर दिखाई दे रहा है, जबकि शेष राशि के उपयोग को लेकर गंभीर सवाल हैं। उन्होंने पूरे मामले की तकनीकी एवं वित्तीय जांच किसी स्वतंत्र अथवा उच्चस्तरीय जांच एजेंसी से कराने की मांग की है।

जांच प्रक्रिया को ठंडे बस्ते में डालने का आरोप

सामाजिक कार्यकर्ता ने आरोप लगाया कि पूर्व में उठाए गए सवालों की जांच प्रक्रिया को गंभीरता से आगे नहीं बढ़ाया गया। उनका कहना है कि यदि किसी योजना में अनियमितता की शिकायत सामने आती है तो केवल टेबल-कुर्सी पर बैठकर कागजी जांच पूरी करने के बजाय स्थल निरीक्षण, मापी और भुगतान से संबंधित दस्तावेजों की जांच होनी चाहिए।उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पूर्व अधिकारियों के कार्यकाल में योजनाओं में 7 प्रतिशत कमीशन यानी ‘पीसी’ की चर्चा रही है। हालांकि, इस संबंध में उन्होंने निष्पक्ष जांच के माध्यम से वास्तविकता सामने लाने की मांग की है।

जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग

सुरेश अग्रवाल ने प्रशासन से सवाल किया कि यदि जांच प्रक्रिया शुरू हुई थी तो उसकी वर्तमान स्थिति क्या है और अब तक क्या निष्कर्ष सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि “जांच प्रक्रिया को ठंडे बस्ते में डालने के पीछे क्या मंशा है, इसे प्रशासन स्पष्ट करे।”उन्होंने डीएमएफटी फंड से संचालित योजनाओं का स्वतंत्र तकनीकी ऑडिट कराने, मौके पर भौतिक सत्यापन करने तथा दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है।

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