पाकुड़ : झारखंड में तंबाकू पर पूरी तरह बैन नहीं है, लेकिन बिक्री और इस्तेमाल पर सख्त कानून हैं। COTPA 2003 – सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम। पूरे भारत की तरह झारखंड में भी लागू है जिसमें नियम सजा : सार्वजनिक जगह पर धूम्रपान ₹200 तक जुर्माना, 18 साल से कम को बेचना ₹200 जुर्माना, स्कूल-कॉलेज के 100 गज दायरे में बेचना ₹200 जुर्माना + सामान जब्त, बिना चेतावनी के बेचना/विज्ञापन 2 साल जेल या ₹5000 जुर्माना, सार्वजनिक जगह = बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, ऑफिस, होटल, रेस्टोरेंट, पार्क, हॉस्पिटल सब।गुटखा-पान मसाला पर बैन2020 से झारखंड में गुटखा, पान मसाला पूरी तरह बैन है। बनाने, बेचने, स्टोर करने, बांटने पर 6 महीने से 3 साल जेल + ₹1 लाख से ₹5 लाख जुर्माना।

खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2006 के तहत ये कार्रवाई होती है। झारखंड सरकार हर साल नोटिफिकेशन निकालकर 1 साल के लिए बैन बढ़ाती है।हुक्का बार पर बैन।2021 से पूरे झारखंड में हुक्का बार बैन हैं। होटल-रेस्टोरेंट में भी हुक्का नहीं चला सकते। पकड़े जाने पर सील + जुर्माना।ई-सिगरेट पर बैन। 2019 से पूरे भारत में ई-सिगरेट, वेप बैन है। झारखंड में भी बनाने, बेचने, इंपोर्ट पर 1 साल जेल + ₹1 लाख जुर्माना पहली बार, दूसरी बार 3 साल जेल + ₹5 लाख जुर्माना।खास बात यह है कि तंबाकू खेती बैन नहीं – झारखंड में तंबाकू उगाने पर रोक नहीं है, सिगरेट-बीड़ी बिकती है – सिर्फ 18+ को, चेतावनी वाले पैकेट में बेच सकते हैं। इसके लिए 104 हेल्पलाइन या नजदीकी थाने में COTPA उल्लंघन की शिकायत कर सकते हैं। कानून होने के बाद भी इसका पालन नहींझारखंड में कानून लागू होने के बावजूद जिलेभर में इसका डर नहीं है, प्रशासन की ढिलाई या कहे अनदेखी के कारण आज अगर सिर्फ सदर प्रखंड की बात करें तो नगर थाना के सामने कई दुकानें है जिसमें स्कूली बच्चों को नशा करते आसानी से दिख जाता है, यहां तक कि छोटे उम्र के बच्चे को भी नशीले पदार्थों का बिक्री किया जाता है। दिल्ली पब्लिक स्कूल के ठीक मुख्य द्वारा के पास एवं सामने दुकानों में नशीले पदार्थों का बिक्री किया जाता है, जहां लोग चाय के साथ नशा का सेवन करते है ।

वही कई विद्यालय ऐसे है जिसके ठीक आस पास तंबाकू की बिक्री की जाती है जिसपर विद्यालय प्रबंधन एवं विभाग बिल्कुल चुप है। नगर थाना क्षेत्र की बात करे तो कई ऐसे गली है जहां प्रतिबंधित ब्राउन शुगर का सेवन किया जाता है। विशेष कर पूरी युवा वर्ग को नशा में धकेल चुका है, धीरे धीरे यह सिस्टम तेजी से बढ़ रहा है जो आने वाले समय पर एक विकराल रूप ले लेगा। जरूरत है इस विकराल रूप को आज से रोकथाम हेतु प्रशासन के साथ आम जनमानस भी कदम उठाएं। जरूरत है इस मामले पर सरकारी स्तर पर जागरूकता अभियान चला कर एनजीओ के साथ रोकथाम हेतु विशेष अभियान चलाया जाये।
