चेन्नई : तमिलनाडु में मुख्यमंत्री विजय के नेतृत्व में भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनाई गई सख्त नीति एक महत्वपूर्ण उदाहरण बनकर सामने आई है। ग्रेटर चेन्नई कॉरपोरेशन में भ्रष्टाचार के आरोपों पर सात अधिकारियों को तत्काल निलंबित किया गया है और उनके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई गई है। इसके साथ ही राज्य सरकार ने भ्रष्टाचार की शिकायत दर्ज कराने के लिए व्हाट्सऐप हेल्पलाइन शुरू कर आम नागरिकों को सीधे व्यवस्था से जोड़ने का प्रयास किया है।

यह कार्रवाई केवल दोषियों पर कार्रवाई भर नहीं, बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र के लिए स्पष्ट संदेश है कि सरकारी पद जनता की सेवा के लिए है, न कि भ्रष्टाचार के लिए। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हर राज्य सरकार भ्रष्टाचार के मामलों में इसी तरह त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई करे, तो सरकारी व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ेगी और आम लोगों का विश्वास भी मजबूत होगा। भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रभावी लड़ाई तभी संभव है जब शिकायतों पर समयबद्ध जांच हो, दोषियों पर बिना किसी राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव के कार्रवाई की जाए और शिकायतकर्ताओं को सुरक्षित एवं सरल माध्यम उपलब्ध कराया जाए। तमिलनाडु की पहल इसी दिशा में एक सकारात्मक कदम मानी जा रही है।
संदेश साफ है—भ्रष्टाचार पर समझौता नहीं, बल्कि त्वरित कार्रवाई ही सुशासन की पहचान है। यदि देश के अन्य राज्य भी ऐसी पारदर्शी और जवाबदेह व्यवस्था अपनाएं, तो सरकारी तंत्र अधिक ईमानदार, जवाबदेह और जनहितैषी बन सकता है।

