नई दिल्ली : भारत इस समय दो महत्वपूर्ण मौसमी परिस्थितियों के बीच है। एक ओर प्रशांत महासागर में अल-नीनो लगातार मजबूत हो रहा है, वहीं दूसरी ओर बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र सक्रिय है, जिसके अगले चरण में और मजबूत होने की संभावना मौसम विभाग ने जताई है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के 21 सितंबर के बुलेटिन के अनुसार, उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी के ऊपर बना स्पष्ट कम दबाव वाला क्षेत्र अगले 48 घंटों में डिप्रेशन और उसके बाद डीप डिप्रेशन में बदल सकता है। इससे पूर्वी भारत के कई हिस्सों में बारिश की गतिविधियां बढ़ने की संभावना है।

अल-नीनो भी हो रहा मजबूत
विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) के सितंबर अपडेट के अनुसार, अल-नीनो पूरी तरह स्थापित हो चुका है और इसके आगे भी मजबूत होने की संभावना है। WMO के अनुसार, इसके सितंबर-नवंबर 2026 और दिसंबर 2026-फरवरी 2027 तक बने रहने की संभावना लगभग 100 प्रतिशत है।वहीं, भारत सरकार के पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने जुलाई में बताया था कि अल-नीनो के अक्टूबर-दिसंबर 2026 के दौरान और मजबूत होने तथा बहुत मजबूत श्रेणी तक पहुंचने की संभावना है। हालांकि, भारत के मौसम पर इसका वास्तविक प्रभाव अन्य समुद्री एवं वायुमंडलीय परिस्थितियों पर भी निर्भर करेगा।
बारिश के पैटर्न पर पड़ सकता है असर
अल-नीनो समुद्र और वायुमंडल की परिस्थितियों को प्रभावित करता है, जिससे दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में बारिश और तापमान के पैटर्न में बदलाव हो सकता है। इसी बीच बंगाल की खाड़ी में सक्रिय मौसम प्रणाली पूर्वी भारत के मौसम को प्रभावित कर सकती है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले दिनों में बंगाल की खाड़ी की प्रणाली और अल-नीनो की स्थिति पर लगातार नजर रखना महत्वपूर्ण होगा। हालांकि, किसी भी क्षेत्र में भारी बारिश, तेज हवा या अन्य मौसमी खतरे की स्थिति स्थानीय IMD चेतावनियों के आधार पर ही स्पष्ट होगी।

