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गांधी जयंती पर मांस-मछली बिक्री रोकने का आदेश बेअसर, सड़क पर खुलेआम सजीं दुकानें

जितिया पर्व के बीच मछली खरीदने उमड़ी भीड़, नगर परिषद के आदेश की खुलेआम हुई अनदेखी; खबर साझा करने पर संवाददाता को प्रशासनिक व्हाट्सएप ग्रुप से हटाने का आरोप

पाकुड़ : राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती पर पाकुड़ नगर परिषद की ओर से मांस-मछली की बिक्री पर रोक लगाने का आदेश गुरुवार को जमीनी स्तर पर बेअसर नजर आया। नगर परिषद की ओर से आदेश की प्रति हाट परिसर एवं संबंधित दुकानों में चस्पा किए जाने के बावजूद शहर की मुख्य सड़क पर मछली की दर्जनों दुकानें सज गईं और दिनभर ग्राहकों की भीड़ लगी रही। गांधी जयंती के अवसर पर नगर परिषद द्वारा मांस-मछली की बिक्री पर रोक लगाने का निर्णय लिया गया था। इसके तहत दुकानदारों को निर्धारित दिन दुकानें बंद रखने का निर्देश दिया गया था। हालांकि, गुरुवार सुबह हाट परिसर से अलग मेला मैदान की ओर जाने वाली सड़क पर कई मछली विक्रेताओं ने खुलेआम दुकानें लगा दीं। देखते ही देखते यहां खरीदारों की भीड़ भी जुट गई और मछलियों की बिक्री होती रही। बताया गया कि इस दिन जितिया पर्व के कारण भी मछली की मांग रही। जितिया पर्व से जुड़ी पारंपरिक मान्यताओं के तहत कई परिवारों में पर्व से पहले मछली का सेवन करने की परंपरा है। ऐसे में बाजार में मछली की मांग अधिक रही, जिसका फायदा उठाते हुए सड़क किनारे दुकानदारों ने दुकानें सजा लीं।

आदेश हाट में चस्पा, लेकिन सड़क पर नहीं दिखा असर

नगर परिषद द्वारा हाट परिसर में मांस-मछली बिक्री पर रोक संबंधी आदेश चस्पा किए जाने के बावजूद हाट से बाहर सड़क किनारे खुलेआम बिक्री होने से नगर परिषद की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि बिक्री पर रोक का आदेश जारी किया गया था, तो सड़क पर लगी दुकानों को हटाने अथवा बिक्री रोकने के लिए कार्रवाई क्यों नहीं की गई।

खबर साझा करने पर संवाददाता को ग्रुप से हटाने का आरोप

मामले की जानकारी जब एक संवाददाता ने जिला प्रशासन से जुड़े व्हाट्सएप ग्रुप में साझा की और सड़क पर खुलेआम हो रही मछली बिक्री की तस्वीर एवं जानकारी प्रशासन तक पहुंचाई, तो इसके बाद विवाद खड़ा हो गया। आरोप है कि दुकानदारों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी अमरेंद्र कुमार चौधरी ने उक्त संवाददाता को प्रशासन एवं नगर परिषद से संबंधित व्हाट्सएप ग्रुप से हटा दिया। इससे सवाल उठ रहा है कि प्रशासनिक व्यवस्था की जमीनी स्थिति सामने लाने वाली खबर पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई और सूचना साझा करने वाले पत्रकार को ही ग्रुप से बाहर करने की जरूरत क्यों पड़ी। हालांकि, इस संबंध में नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी अमरेंद्र कुमार चौधरी का पक्ष खबर लिखे जाने तक उपलब्ध नहीं हो सका। उनका पक्ष मिलने पर उसे भी प्रकाशित किया जाएगा। गांधी जयंती जैसे राष्ट्रीय महत्व के दिन नगर परिषद के आदेश के बावजूद सड़क पर मछली की खुलेआम बिक्री और उसके बाद पत्रकार को प्रशासनिक ग्रुप से हटाए जाने की घटना ने नगर परिषद की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक पारदर्शिता को लेकर चर्चा तेज कर दी है।

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