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नो एंट्री से कब मिलेगी राहत डीसी साहब, पूछ रही है नगर की जनता

पाकुड़ अपडेट : एक तो त्योहारों का मौसम जहां खरीदारी करने एवं अन्य कार्य के लिए सड़कों पर बच्चे बूढ़े एवं सभी की भीड़ लगी हुई है वही क्षमता से अधिक वाहन होने के कारण सड़कों पर जाम की स्थिति बनी रहती है। इसी बीच नो एंट्री का बंद न होना शहर वासियों के लिए एक चिंता का विषय बनता जा रहा है। ज्ञात हो इस नो एंट्री के मामले को लेकर नगर परिषद चुनाव में अध्यक्ष पद पर सभी उम्मीदवारों का दावा था की जीत के बाद नो एंट्री पर अंकुश लगाया जाएगा। ऐसा ही दावा वर्तमान नवचयनित नगर परिषद अध्यक्ष साबरी पाल ने भी नगर की जनता से किया था लेकिन आज जीतने के बाद और शपथ लेने के बाद कई दिन बीत गए लेकिन अब तक नो एंट्री को लेकर किसी प्रकार का सकारात्मक पहल सबरी पाल के द्वारा नहीं किया गया। आज पाकुड़ नगर की जनता डीसी साहब और नगर परिषद अध्यक्ष से पूछ रही है कि कब इस नो एंट्री से मुक्ति मिलेगी। इस नो एंट्री के कारण कभी भी बड़ी दुर्घटना घट सकती है कारण मुख्य सड़क किनारे बिल्टी स्कूल के साथ-साथ कई ऐसे विद्यालय हैं जिनके बच्चे की छुट्टी तीन से लेकर 3:30 बजे के बीच होती है और यह समय नो एंट्री का नहीं रहता है और बड़ी वाहनों की रफ्तार मानो हाईवे में चल रहा हो। ऐसा ही एक नजर गुरुवार को दोपहर 3:15 बजे देखने को मिला जब बिल्टी स्कूल के सामने विद्यालय की छुट्टी होने के उपरांत विद्यालय की प्राचार्य एवं शिक्षिका बच्चों को सड़क पार करने के लिए खुद सड़क पर खड़ा होकर वाहनों को रोकने का इशारा कर रही है लेकिन एक हाईवे WB 37 E 3919 यह सारा नजारा दूर से देखने के बाद भी नजदीक तक पहुंचने के बाद ब्रेक लगाती है और तुरंत निकल जाती है मतलब किसी की जान चल जाए इससे इन बड़े वाहनों की कोई प्रवाह नहीं बस इनको अपना ओवरलोडिंग माल समय पर तेज रफ्तार से बंगाल पहुंचना प्राथमिकता है। नो एंट्री सिर्फ नाम का रह गया है क्योंकि नो एंट्री के बाद भी ट्रैक्टर ओवरलोड होकर इन दोनों गली कुची होकर अपने माल बंगाल सहित कई जगहों पर लेकर जा रही है जिस पर पुलिस रोकने में पूरी तरह से विफल है मानो इन लोगों को पूरी छूट जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन द्वारा दी गई हो।

नो एंट्री के कारण हम लोग को काफी डर लगता है : बिल्टी स्कूल के प्राचार्य

मामले को लेकर जब बिल्टी स्कूल के शिक्षिका से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि हर दिन यह एक अतिरिक्त ड्यूटी हम लोगों को करना पड़ता है और काफी डर लगता है क्योंकि इन बड़े वाहनों की गति बड़ी तेज रहती है साथ ही यह लोग बहुत नजदीक आकर ब्रेक लगाते हैं, डर लगता है कि कहीं किसी बच्चे के साथ कोई अप्रिय घटना न घट जाए लेकिन इस मामले को लेकर कई बार विभाग सहित सड़क सुरक्षा को लिखा गया लेकिन कोई पहल अब तक नहीं हो पाया है।

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